रमी में मकरूह बातें

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بِسْمِ اللّٰہِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیۡمِ

रमी में बारह चीज़ें मकरूह हैं

  • दस (10) तारीख़ की रमी ग़ुरूब-ए-आफ़ताब के बाद करना।
  • तेरह (13) को रमी दोपहर से पहले करना।
  • रमी में बड़ा पत्थर मारना।
  • बड़े पत्थर को तोड़ कर कंकरियाँ बनाना।
  • मस्जिद की कंकरियाँ मारना।
  • जमरा के नीचे जो कंकरियाँ पड़ी हैं उठा कर मारना कि ये मरदूद कंकरियाँ हैं जो क़ुबूल होती हैं वह उठा ली जातीं हैं कि क़यामत के दिन नेकियों के पल्ले में रखी जायेंगी वरना जमरों के गिर्द पहाड़ हो जाते।
  • नापाक कंकरियाँ मारना।
  • सात से ज़्यादा मारना।
  • रमी के लिये जो सिम्त (दिशा) बताई गई है उसके ख़िलाफ़ करना।
  • जमरा से पाँच हाथ से कम फ़ासले पर खड़ा होना, ज़्यादा का हर्ज नहीं।
  • जमरों में तरतीब के ख़िलाफ़ करना।
  • मारने के बदले कंकरी जमरा के पास डाल देना।

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