हल्क़ व तक़सीर यानि सिर के बाल मुंडवाना या कतरवाना

हल्क़ व तक़सीर यानि सिर के बाल मुंडवाना या कतरवाना

0
903

بِسْمِ اللّٰہِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیۡمِ

  • क़ुरबानी के बाद क़िबला रुख़ बैठ कर मर्द हल्क़ करें यानि पूरे सिर के बाल उस्तरे (Razor) से साफ़ कराएं यह ही अफ़ज़ल और सुन्नत भी है।
  • बाल कतरवाने की भी छूट है लेकिन बेहतर हल्क़ ही है।
  • औरतों को बाल मुंडाना हराम है वह सिर्फ़ एक पोरवे के बराबर बाल कतरवा दें बल्कि ख़ुद ही अपने बाल एक पोरवे के बराबर काट दें।
  • मुफ़रिद अगर क़ुरबानी करे तो उसके लिए मुस्तहब यह है कि क़ुरबानी के बाद हल्क़ करे और अगर हल्क़ के बाद क़ुरबानी की जब भी हर्ज नहीं।
  • हज-ए-तमत्तो या क़िरान वालों पर क़ुरबानी के बाद हल्क़ करना वाजिब है यानि अगर क़ुरबानी से पहले सर मुंडायेगा तो दम वाजिब होगा।
  • बाल कतरवायें तो सिर में जितने बाल हैं उनमें से चौथाई बालों का कतरवाना ज़रूरी है यानि सिर के हर-हर बाल से चौथाई हिस्सा बाल कटवाना ज़रूरी है।
  • सिर मुंडाने या बाल कतरवाने का वक़्त अय्याम-ए-नहर (क़ुरबानी वाले दिन) है यानि10, 11, 12 और अफ़ज़ल पहला दिन यानि दस ज़िलहिज्जा है।
  • जब एहराम से बाहर होने का वक़्त आ गया तो अब मुहरिम अपना या दूसरे का सिर मूंड सकता है अगर्चे यह दूसरा भी मुहरिम हो।
  • जिसके सिर पर बाल न हों उसे उस्तरा फिरवाना वाजिब है, और अगर बाल हैं मगर सिर में कोई जख़्म या फुन्सी हैं जिनकी वजह से मुंडा नहीं सकता और बाल इतने बड़े भी नहीं कि कतरवाये तो इस उ़ज़्र के सबब उससे मुंडवाना और कतरवाना माफ़ हो गया उसे भी मुंडवाने वालों और कतरवाने वालों की तरह सब चीज़ें हलाल हो गईं मगर बेहतर यह है कि अय्यामे नहर के ख़त्म होने तक बदस्तूर रहे।
  • यह भी ज़रूरी है कि हरम से बाहर मुंडवाना या कतरवाना न हो बल्कि हरम के अन्दर हो कि इसके लिए यह जगह मख़सूस है, हरम से बाहर करेगा तो दम ज़रूरी होगा।
  • इस मौक़े पर सिर मुंडवाने के बाद मूंछे तरशवाना नाफ़ के नीचे के बाल दूर करना मुस्तहब है और दाढ़ी के बाल न ले और लिये तो दम वग़ैरा वाजिब नहीं।
  • अगर बाल न मुंडवाये और न कतरवाये तो वह चीज़ें जो एहराम में हराम थी हलाल नहीं हुईं अगर्चे तवाफ़ भी कर चुका हो।
  • अगर बारह तारीख़ तक हल्क़ व क़स्र (बाल मुँडाना व कतरवाना) न किया तो दम लाज़िम आयेगा कि इसके लिए यह वक़्त मुक़र्रर है।
  • हल्क़ या तक़सीर दाहिनी तरफ़ से शुरू करें (यानि मुंडवाने वाले की दाहिनी जानिब यही हदीस से साबित और इमामे आज़म ने भी ऐसा ही किया लिहाज़ा बाज़ किताबों में जो हज्जाम की दाहिनी जानिब से शुरू करने को बताया सही नहीं)।
  • हल्क या क़स्र के वक़्त यह तस्बीह पढ़ते रहें और फ़ारिग़ होने के बाद भी पढ़ें–

اَللّٰهُ اَكْبَرُ اَللّٰهُ اَكْبَرُ لَا اِلٰهَ اِلَّا اللّٰهُ

 وَاَللّٰهُ اَكْبَرُ اَللّٰهُ اَكْبَرُ وَلِلّٰهِ الْحَمْدُ

  • बाल दफ़न कर दें और हमेशा बदन से जो चीज़ बाल, नाख़ून, खाल जुदा हो दफ़न कर दिया करें।
  • हल्क़ या तक़सीर से पहले नाख़ून न कतरवाओ न ख़त बनवाओ वरना दम लाज़िम आयेगा।

इसके बाद अब औरत से सोहबत करने, शहवत से उसे हाथ लगाने, बोसा लेने, शर्मगाह देखने के अलावा जो कुछ एहराम के दौरान हराम था सब हलाल हो गया।

NO COMMENTS