वुज़ू की ज़रूरत और फ़जीलत

वुज़ू की ज़रूरत और फ़जीलत

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بِسْمِ اللّٰہِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیۡمِ

नमाज़ के लिये वुज़ू ऐसी ज़रूरी चीज़ है कि इसके बिना नमाज़ होती ही नहीं बल्कि जान बूझ कर बग़ैर वुज़ू नमाज़ अदा करने को उलमा कुफ़्र लिखते हैं। यह इसलिए कि उस बेवुज़ू या बेग़ुस्ल नमाज़ पढ़ने वाले ने इबादत की बेअदबी और तौहीन की। नबी-ए-करीम گ ने फ़रमाया है कि जन्नत की कुंजी नमाज़ है और नमाज़ की कुंजी तहारत है। क़ुरआन और हदीस मे वुज़ू के बहुत से फ़ज़ाइल बयान हुए हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है

یٰۤاَیُّہَا الَّذِیۡنَ اٰمَنُوۡۤا اِذَا قُمْتُمْ اِلَی الصَّلٰوۃِ فَاغْسِلُوۡا وُجُوۡہَکُمْ

وَاَیۡدِیَکُمْ اِلَی الْمَرَافِقِ وَامْسَحُوۡا بِرُءُ وۡسِکُمْ وَ اَرْجُلَکُمْ اِلَی الْکَعْبَیۡ

(ऐ ईमान वालो जब नमाज़ को खड़ा होना चाहो तो अपना मुँह धो
और कोहनियों तक हाथ और सिरों का मसह करो और गट्टों तक पैर धो)

(अल माईदा, आयत 6)

वुज़ू की फ़जीलत़ में कुछ अहादीस

  • हुज़ूर अक़दस گ इरशाद फ़रमाते हैं कि क़यामत के दिन मेरी उम्मत इस हालत में बुलाई जायेगी कि मुँह, हाथ और पैर, वुज़ू की वजह से चमकते होंगे तो जिससे हो सके चमक ज़्यादा करे।

    (सही बुख़ारी)

  • हुज़ूर सय्यदे आलम گ ने सिहाबा से इरशाद फ़रमाया कि क्या मैं तुम्हें ऐसी चीज़ न बता दूँ कि जिसके सबब अल्लाह तअ़ाला ख़तायें माफ़ कर दे और दर्जे बलंद करे। सिहाबा ने अर्ज़ किया जी, या रसूलल्लाह! हुज़ूर گ ने फ़रमाया जिस वक़्त वुज़ू नागवार होता है उस वक़्त अच्छी तरह पूरा वुज़ू करना और मस्जिदों की तरफ़ ज़्यादा जाना और एक नमाज़ के बाद दूसरी नमाज़ का इन्तज़ार करना इसका सवाब ऐसा है जैसा काफ़िरों की सरहद पर इस्लामी शहरों की हिमायत के लिये घोड़ा बाँधने का सवाब है।

    (सही मुस्लिम)

  • जो वुज़ू पर वुज़ू करता है उसके नामा-ए-आमाल में अल्लाह तआला दस नेकियाँ लिख देता है

    जामा-ए-तिरमिज़ी)

  • जब मुसलमान वुज़ू करते हुए कुल्ली करता है तो उसके मुँह से गुनाह निकल जाते हैं और जब वह नाक साफ़ करता है तो उसके नाक से गुनाह निकल जाते हैं। जब वह मुँह धोता है तो उसके चेहरे के गुनाह धुल जाते हैं यहाँ तक कि उसकी आँखों की पुतलियों के नीचे से भी गुनाह निकल जाते हैं। जब वह बाज़ू धोता है तो उसके नाख़ूनों के नीचे तक के तमाम गुनाह निकल जाते हैं। जब वह सिर का मसह करता है तो उसके सिर के गुनाह निकल जाते हैं, यहाँ तक कि कानों के नीचे तक के गुनाह गिर जाते हैं। जब वह पाँव धोता है तो उसके पाँव के नाख़ूनों के नीचे तक के तमाम गुनाह निकल जाते हैं। फिर उसका मस्जिद की तरफ़ चलना और नमाज़ पढ़ना उसकी इबादत में दाखि़ल हो जाता है और मरवी है कि बावुज़ू आदमी रोज़ादार की तरह है।

    (सुनन अननिसाइ)

  • जिस शख़्स ने सही तरह वुज़ू किया और उसके बाद आसमान की तरफ़ नज़र उठा कर दूसरा कलमा पढ़े तो उसके लिये जन्नत के आठों दरवाज़े खोल दिये जाते हैं जिस दरवाज़े से चाहे दाखि़ल हो जाये। दूसरा कलमा यह हैः-

    اَشۡھَدُ اَنۡ لَّا اِلٰھَ اِلَّااللّٰھُ وَحۡدَہٗ لَا شَرِیۡکَ لَھٗ وَاَشۡھَدُاَنَّ مُحَمَّدً عَبۡدُہٗ وَرَسُوۡلُھٗ

    (मैं गवाही देता हूँ अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं वह अकेला है
    उसका कोई शरीक नहीं और गवाही देता हूँ कि मुहम्मद گ उसके बन्दे और रसूल हैं।)

क़ुरआन पाक और अहादीस में बयान किए गए वुज़ू के फ़ज़ाइल पढ़ने के बाद वुज़ू की अहमियत और इस से हासिल होने वाले अज्र और सवाब का बख़ूबी अंदाज़ा लगाया जा सकता है और जो शख़्स हमेशा बावुज़ू रहता है तो अल्लाह तआला उसे सात ख़सलतों की इज़्ज़त बख़्शता है।

  1. फ़रिश्ते उनके साथ रहना पसंद करते हैं।
  2. आमाल लिखने वाले फ़रिश्ते उसका सारा वक़्त इबादत में लिखते रहते हैं।
  3. बदन के तमाम हिस्से तस्बीह करते हैं।
  4. जमाअत में उसकी पहली तकबीर कभी नहीं छूटती।
  5. फ़रिश्ते उसकी हिफ़ाज़त करते हैं।
  6. अल्लाह तआला जान निकलने के वक़्त की मुश्किल को आसान फ़रमाता है।
  7. जब तक वुज़ू रहे अल्लाह तआला की अमान में रहता है।

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