बातें जो एहराम में जाइज़ है

बातें जो एहराम में जाइज़ है

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بِسْمِ اللّٰہِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیۡمِ

 

  • कुर्ता वग़ैरा लेट कर ऊपर से इस तरह डाल लेना कि सिर और मुँह न छिपे।
  • चादर के पल्लुओं को तहबन्द में घुरसना।
  • वह पेटी जिसमें रुपया-पैसा या ज़रूरी काग़ज़ात रख कर सफ़र की हालत में कमर से बाँध लेते हैं या सिर्फ़ पट्टी बाँधना या हथियार बाँधना।
  • ना मैल छुड़ाए लोटे वग़ैरा से नहाना, पानी में ग़ोता लगाना, कपड़े धोना जबकि जूँ मारने की ग़र्ज़ से न हो।
  • मिस्वाक करना।
  • किसी चीज़ के साये में बैठना, छतरी लगाना।
  • अँगूठी पहनना, बिना ख़ुशबू का सुर्मा लगाना।
  • दाढ़ उखाड़ना, टूटे हुए नाख़ून का अलग करना, फोड़ा या फुन्सी तोड़ देना, ख़तना करना।
  • आँख में जो बाल निकले उसे जुदा करना, सिर या बदन इस तरह आहिस्ता खुजाना कि बाल न टूटे।
  • एहराम से पहले जो ख़ुशबू लगाई थी उसको लगे रहने देना।
  • पालतू जानवर ऊँट, भैंस,गाय, बकरी, मुर्ग़ी वग़ैरा ज़िबह करना, पकाना, खाना और उसका दूध दूहना उसके अन्डे तोड़ना, भूनना, खाना।
  • जिस जानवर को ग़ैर मुहरिम (यानि जो एहराम में नहीं है) ने शिकार किया और किसी मुहरिम ने उसके शिकार या ज़िबह में किसी तरह की मदद न की हो तो उसका खाना इन शर्तों के साथ कि वह जानवर न हरम का हो न हरम में ज़िबह किया गया हो।
  • खाने के लिए मछली का शिकार करना या दवा के लिए किसी दरियाई जानवर का मारना,
  • हरम के बाहर की घास उखाड़ना या दरख़्त काटना।
  • चील, कौआ, चूहा, गिरगिट, छिपकली, साँप, बिच्छू, खटमल, मच्छर, पिस्सू, मक्खी वगै़रा ख़बीस व मूज़ी (तकलीफ़ देने वाले) जानवरों का मारना चाहे हरम में हो।
  • मुँह और सिर के सिवा किसी और जगह ज़ख़्म पर पट्टी बाँधना।
  • सिर या गाल के नीचे तकिया रखना।
  • सिर या नाक पर अपना या दूसरे का हाथ रखना।
  • कान कपड़े से छुपाना, ठोड़ी से नीचे दाढ़ी पर कपड़ा आना।
  • सिर पर थाल या बोरी उठाना।
  • जिस खाने के पकने में मुश्क या कोई और ख़ुशबू वग़ैरा पड़े हों चाहे, ख़ुशबू दें।
  • घी या चर्बी या कड़वा तेल या नारियल या बादाम या लौकी का तेल कि अलग से इन चीज़ों में ख़ुशबू न मिलाई गई हो, इनका बालों या बदन में लगाना।
  • ख़ुशबू के रंगे हुए कपड़े पहनना जबकि उनकी ख़ुशबू जाती रही हो मगर कुसुम, ज़ाफ़रान का रंग मर्द को वैसे ही हराम है।
  • दीन के लिए झगड़ना बल्कि ज़रूरत के वक़्त फ़र्ज़ व वाजिब है।
  • जूता पहनना जो पाँव के जोड़ को न छुपाये।
  • बिना सिले कपड़े में लपेट कर तावीज़ गले में डालना।
  • आईना देखना।
  • ऐसी ख़ुशबू का छूना जिसमें फ़िलहाल महक नहीं जैसे अगर, लोबान, सन्दल या उसका आँचल में बाँधना।
  • निकाह करना।

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