हज का तरीक़ा मुख़्तसर (Short)

हज का तरीक़ा मुख़्तसर (Short)

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بِسْمِ اللّٰہِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیۡمِ

आम तौर पर भारत और पाकिस्तान से जाने वाले लोग हज-ए-तमत्तो करते हैं लिहाज़ा हम उसी का तरीक़ा सिलसिलेवार यहाँ बयान कर रहे हैं।

  1. घर से रवानगी
  2. मीक़ात से पहले उमरे की नीयत से एहराम बाँधना, यह शर्त है।
  3. काबा शरीफ़ का तवाफ़ रमल के साथ करना।
  4. मुक़ाम-ए-इब्राहीम पर दो रकअत नमाज़ पढ़ना और आबे ज़म-ज़म पीना।
  5. उमरे की सई करना यानि सफ़ा और मरवा के दरमियान सात चक्कर लगाना।
  6. सिर के बाल मुंडवाना या कतरवाना और एहराम खोलना।
  7. आठ (8) ज़िलहिज्जा को हज का एहराम बाँधना और मिना जाकर ज़ुहर, अस्र, मग़रिब और इशा की नमाज़ अदा करना।
  8. नौ (9) ज़िलहिज्जा को अराफ़ात में ज़ुहर और अस्र की नमाज़ अदा करना और वुक़ूफ़-ए-अराफ़ात करना यानि अराफ़ात में ठहरना।
  9. नौ (9) ज़िलहिज्जा को सूरज डूबने के बाद अराफ़ात से मुज़दलफ़ा पहुँच कर मग़रिब और इशा की नमाज़ मिलाकर पढ़ना। रात को मुज़दलफ़ा में क़याम करना और सूरज निकलने से कुछ पहले तक वुक़ूफ़-ए-मुज़दलफ़ा करना यानि मुज़दलफ़ा में ठहरना।
  10. दस (10) ज़िलहिज्जा मुज़दलफ़ा से मिना को आना और जमरा-ए-अक़बा यानि बड़े शैतान को कंकरियाँ मारना।
  11. क़ुरबानी करना और सिर के बाल मुंडवाना या कतरवाना।
  12. दस (10) ज़िलहिज्जा को मक्का-ए-मुकर्रमा में जाकर तवाफ़-ए-ज़ियारत करना ।
  13. हज की सई करना यानि सफ़ा और मरवा के दरमियान सात चक्कर लगाना।
  14. फिर मिना वापस आना और 11, 12, 13 ज़िलहिज्जा को यहीं क़याम करना और इन तीनों दिन रमी जमार करना यानि तीनों शैतानों को कंकरियाँ मारना।
  15. मक्का आकर तवाफ़-ए-विदा करना।
  16. ख़ास ज़ियारत के इरादे से मदीना शरीफ़ का सफ़र करना।

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