सफ़ा व मरवा की सई

सफ़ा व मरवा की सई

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بِسْمِ اللّٰہِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیۡمِ

सई के मानी चलने या दौड़ने के हैं और हज के दौरान सफ़ा और मरवा के दरमियान ख़ास तरीक़े से सात चक्कर लगाने को सई कहते हैं।

सई के मुताल्लिक़ ध्यान देने लायक़ ज़रूरी बातें

  • अगर कोई उज़्र थकान वग़ैरा का नहीं है तो तवाफ़ के बाद सई में देर नहीं करनी चाहिए मकरूह है।
  • सफ़ा व मरवा में सई के लिए फिर हजर-ए-असवद के पास आएं और उसी तरह तकबीर वग़ैरा कह कर चूमें और न हो सके तो उसकी तरफ़ मुँह करके और दुरूद शरीफ़ पढ़ते हुए फ़ौरन बाब-ए-सफ़ा से सफ़ा की तरफ़ रवाना हों।
  • जब तवाफ़ के बाद सई करनी हो तो वापस आकर हजर-ए-असवद का इस्तिलाम करके सई को जाये और सई न करनी हो तो इस्तिलाम की ज़रूरत नहीं।
  • सई के लिए बाब-ए-सफ़ा से जाना मुस्तहब है और यही आसान भी है और अगर किसी दूसरे दरवाज़े से जायेंगे जब भी सई अदा हो जायेगी।
  • ज़िक्र व दुरूद में मशग़ूल रहते हुए सफ़़ा की सीढ़ियों पर इतना चढ़ें कि काबा-ए-मौअज़्ज़मा नज़र आये।
  • सई शुरू करने से पहले यह दुआ पढ़े दुआ याद न हो तो किसी किताब से देख कर पढ़े या उसका उर्दू तर्जुमा पढ़ें या फिर कोई दुरूद पढ़े।

اَبْدَأُ بِمَا بَدَأَ اللّٰہُ بِہِٓ اِنَّ الصَّفَاوَالْمَرْوَۃَ مِنْ شَعَآئِرِاللّٰہؕ

فَمَنْ حَجَّ الْبَیْتَ اَوِاعْتَمَرَ فَلَا جُنَاحَ عَلَیْہِ

اَنْ یَّطَّوَّفَ بِھِمَاوَمَنْ تَطَوَّعَ خَیْرًافَاِنَّ اللّٰہ شَاکِرٌ عَلِیْمٌ ؕ

(मैं उससे शुरू करता हूँ जिसका अल्लाह ने पहले ज़िक्र किया बेशक सफ़ा और मरवा अल्लाह की निशानियों में से हैं जिसने हज या उमरा किया उस पर उनके तवाफ़ में गुनाह नहीं और जो शख़्स नेक काम करे तो बेशक अल्लाह बदला देने वाला जानने वाला है।)

  • फिर काबा-ए-मौअज़्ज़मा की तरफ़ मुँह करके दोनों हाथ कँधों तक इस तरह उठाएं जैसे दुआ माँगने के लिये उठाते हैं न कि इस तरह जैसे नमाज़ में तकबीर-ए-तहरीमा कहते वक़्त ख़ाना-ए-काबा की तरफ़ हथेलियाँ करके उठाते हैं।
  • इतनी देर तक ठहरें जितनी देर में कोई दरमियानी सूरत पढ़ी जाती है जैसे सूरह अलहुजरात वग़ैरा या सूरह अलबक़राह की पच्चीस आयतों की तिलावत की जाये और तस्बीह व तहलील व तकबीर (यानि सुब्ह़ानल्लाह, ला इलाहा इल्लल्लाहअल्लाहु अकबर) व दुरूद शरीफ़ पढ़ें और अपने लिये और अपने दोस्तों और दूसरे तमाम मुसलमानों के लिए दुआ करें।
  • ध्यान रहे दुआ में हथेलियाँ आसमान की तरफ़ हों न कि उस तरह जैसे कुछ लोग कम इल्मी की वजह से हथेलियाँ काबा-ए-मौअज़्ज़मा की तरफ़ करते हैं।
  • अक्सर तवाफ़ कराने वाले हाथ कानों तक उठवाते हैं फिर छोड़ देते हैं यूँ ही तीन बार करवाते हैं यह भी ग़लत तरीक़ा है बल्कि एक बार दुआ के लिए हाथ उठायें और जब तक दुआ माँगे उठाये रहें जब ख़त्म हो जाये हाथ छोड़ दें।
  • फिर सई की नीयत करे उसकी नीयत इस तरह है:

اَللَّھُمَّ  اِنِّیۡ اُرِیۡدُ السَّعْیَ بَیْنَ الصَّفَا  وَالْمَرْوَۃِ  سَبْعَۃَ اَشْوَاطٍ

 لِوَجْھِکَ الْکَرِیْمِ  فَیَسِّرْہُ  لِیۡ وَتَقَبَّلْہُ مِنِّیۡ

(तर्जुमा: ऐ अल्लाह! बेशक मैं नीयत करता हूँ सफ़ा और मरवा के दरमियान सई के सात चक्करों की

ख़ास तेरी ख़ुशनूदी और रज़ा के लिये तो तू उसको आसान कर और उसको मेरी तरफ़ से क़ुबूल फ़रमा।)

  • फिर सफ़ा से मरवा की तरफ़ चलें और ज़िक्र व दुरूद बराबर जारी रखें।
  • सफ़ा और मरवा के दरमियान दो हरे रंग की निशानियाँ जिन्हें “मीलैन अख़ज़रैन” कहते हैं यहाँ पर पहचान के लिये हरी लाइट्स लगा दी हैं
  • जब वह जगह आये जहाँ दीवार में हरे रंग की लाइट्स हैं और यह सफ़ा से थोड़े ही फ़ासले पर हैं।
  • यहाँ से दौड़ना शुरू करें (मगर न हद से ज़्यादा और न किसी को तकलीफ़ देते हुए) यहाँ तक कि दूसरी निशानी से निकल जायें।
  • इस दरमियान भी दुआ करें यहाँ भी दुआएं क़ुबूल होती हैं। हुज़ूर-ए-अकरमگ से यह दुआ मनक़ूल है।

 ؕرَبِّ ا غْفِرْ وَرْحَمْ وَ اَنْتَ الْاَعَزُّ الْاَکْرَمُ

(या अल्लाह ! बख़्शिश और रहमत फ़रमा तू बड़ा इज़्ज़त वाला और बड़ा ही करम करने वाला है)

  • दूसरी निशानी से निकल कर आहिस्ता हो जाएं और यह दुआ बार-बार पढ़ते रहें।
  • हरी लाईट्स की निशानियों के दरमियान तेज़ चलना सिर्फ़ मर्दों के लिये है औरतें अपनी आम चाल से चलें।
  • इस तरह मरवा पर पहुँचने पर एक चक्कर पूरा हो गया।
  • फिर यहाँ से सफ़ा की तरफ़ ज़िक्र व दुआयें पढ़ते हुए वापस जाएं पहले की तरह जब पहली निशानी पर पहुँचें तो तेज़ चलना शुरू कर दें और दूसरे से निकलने के बाद आहिस्ता हो जाएं।
  • इस तरह सात (7) चक्कर पूरे करें कि सातवाँ फेरा मरवा पर ख़त्म हो।
  • ध्यान रहे कि दोनों मीलों (हरी निशानियों) के दरमियान अगर दौड़ कर न चले या सफ़ा से मरवा तक दौड़ कर गये तो यह बुरा किया क्योंकि सुन्नत छूट गई मगर इस पर दम या सदक़ा वाजिब नहीं होता
  • सई में इज़्तिबा भी नहीं है यानि दाहिना कंधा नहीं खोलना है।
  • अगर भीड़ की वजह से दोनों निशानियों के दरमियान दौड़ने से मजबूर हैं तो कुछ ठहर जाएं कि भीड़ कम हो जाए और दौड़ने का मौक़ा मिल जाए और अगर ऐसा है कि कुछ देर ठहरने के बाद भी भीड़ कम नहीं होगी तो दौड़ने वालों की तरह चलें।
  • अगर उज़्र की वजह से व्हील चेयर पर किसी को सई करा रहे हैं तो इस दरमियान में इसका ख़्याल रहे कि किसी को तकलीफ़ या परेशानी न हो कि यह हराम है।

Sai-safa-marwa

सफ़ा और मरवा की सई का मन्ज़र

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