नमाज़ छोड़ने की आफ़तें

नमाज़ छोड़ने की आफ़तें

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1857

بِسْمِ اللّٰہِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیۡمِ

  • जिसकी नमाज़ फ़ौत हुई (यानि छूट गई) तो गोया उसके अहल (घर वाले) और माल जाते रहे।
         (सही बुख़ारी)
     
  • जिसने जानबूझ कर नमाज़ छोड़ी जहन्नुम के दरवाज़े पर उसका नाम लिख दिया जाता है।  
     (कन्ज़ुल आमाल)

     
  • जो जानबूझ कर नमाज़ छोड़ देता है अल्लाह व रसूल पर उसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं है।    
    (मुसनद इमाम अहमद)

     
  • जिस दीन में नमाज़ नहीं उसमें कोई ख़ैर नहीं।          (मुसनद इमाम अहमद)

     
  • जिसने नमाज़ छोड़ दी उसका कोई दीन नहीं नमाज़ दीन का सुतून है।      (शैबुल ईमान)

     
  • इस्लाम में उसका कोई हिस्सा नहीं जिस के लिए नमाज़ न हो।         (कन्ज़ुल आमाल)

     
  • जिस ने नमाज़ की हिफ़ाज़त और पाबन्दी की, क़यामत के दिन वह नमाज़ उसके लिए नूर और बुरहान यानि पक्की दलील और निजात होगी और जिस ने हिफ़ाज़त और पाबन्दी नहीं की उसके लिए न नूर है , न बुरहान  और न निजात और वह क़यामत के दिन क़ारून , फ़िरऔन ,  हामान व उबई इब्ने ख़ल्फ़ (यानि अल्लाह के दुश्मनों) के साथ होगा।               (मुसनद इमाम अहमद)
     
  • जिस शख़्स ने सही वक़्त पर सही तरह से नमाज़ अदा की, रुकू और सजदे पूरी तरह अदा किये और ख़ुशू यानि आजिज़ी को बरक़रार रखा उसकी नमाज़ रौशन होकर ऊपर चढ़ती है और यह दुआ देती है कि जिस तरह तूने मेरी हिफ़ाज़त की है अल्लाह तेरी भी हिफ़ाज़त करे और जिसने ग़ैर वक़्त नमाज़ पढ़ी, न सही वुज़ू किया, न रुकू और सजदे सही किये और न ही ख़ुशू बरक़रार रखा उसकी नमाज़ स्याह होकर ऊपर चढ़ती है और दुआ करती है कि जिस तरह तूने मुझे ज़ाय यानि बर्बाद किया अल्लाह तुझे भी ज़ाय करे, यहाँ तक कि जब वह वहाँ पहुँच जाती है जहाँ अल्लाह चाहता है तो पुराने कपड़े की तरह लपेट कर मुँह पर मार दी जाती है।            
     (तिबरानी औसत में)

     
  • चोरी में सबसे बुरा शख़्स वह है जो अपनी नमाज़ में से चोरी करे।      (इमाम अहमद, हाकिम)
     

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